Tuesday, 8 October 2013

Thanks to SUPREME COURT

करीब 2 महिने पहले सर्वोच्य न्यायलय ने एक बहुत ही महत्वपुर्ण निर्देश दिया कि "अगर किसी भी संसद सदस्य को 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है तो उसकी संसद सद्स्यता तुरंत चली जयेगी,और वो जेल मे रहते हुए चुनाव भी नही लड पायेगा"

सर्वोच्य न्यायलय द्वारा ये निर्देश "उच्चन्यायलय -पटना" के द्व्वरा एक निर्णय को सही मानते हुये दिया,जिसमे ये कहा गया था कि "अगर पुलिस की हिरासत मे कैद एक आम आदमी की वोट डालने का सम्विधानिक अधिकार(मुलभूत अधिकार, पैरा १५) का हनन हो जाता है, तो जेल मे रहते हुये कोई चुनाव कैसे लड सकता है।"

परंतु हमारे राज नेता तो इसका जोर - शोर से विरोध करते दिखे । क्यो ......?  क्या आप को बाताने की जरुरत है ?

और एक अच्छी बात तो ये रही कि इस निर्णय को पलट्ने के लिये संसद मे विधेयक भी लाया गया, और विना किसी विरोध के पास हो गया....वाह रे देश की राजनीति, धन्य देश के राजनेता। इतने जल्दि तो देश का बजट भी पास नही हो पाता, बात बजट की हो रही है,लेकिन हमे तो संसद मे हल्ला करने का बहाना चाहिये, देश की जानता जाये गढ्ढे मे ।

जब देश के युवक दिसम्बर'12 मे सडको पे उतर आये थे और मांग उठी थी कि सदन का विशेष सत्र बुलाके कुछ निर्णय लिया जाये, तब सरकार ने इसे मानने से मना कर दिया था,और Opposition भी अपनी कान मे तेल डाल के बैठा था। परंतु आज तो माननीय सर्वोच्य न्यायलय का निर्देश तो संसद के दोनो सदन के राजनेताओ पर लागू होता है तो सब सुनायी देता है और दिखायी भी देता है । भाई आखिर Career का सवाल है।

वो तो भला हो राहुल गांधी का जिनके दिल ने कहा की ये गलत है । अब सब हा मे हा मिला ने लगे ।

लेकिन कुछ्छ भी कहिये , हमे गर्व है अपने न्याय व्यवस्था पर जिसने राजनीति को साफ सुथरा करने के लिये ये कदम उठाया। अब तो हम भी वोट डालने मे हम आपना पुर्ण योगदान देंगे, क्योकी हमारे पास है 

  RIGHT TO REJECT 


अब चुनाव मे खडा करो गुंडो - बदमाशो को.....देखो आम आदमी की ताकत...

Salute to Supreme Court 

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